भगवान शिव के व्रत और त्योहार

By adarsh

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भगवान शिव, हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक, त्रिदेवों में से एक हैं। वे विनाश के देवता के रूप में जाते हैं, लेकिन वे प्रेम, करुणा और क्षमा के भी प्रतीक हैं। भगवान शिव की प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने के लिए कई व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं।

प्रमुख व्रत:

1. सोमवार का व्रत: सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है और मंत्रोच्चार किया जाता है।

2. प्रदोष व्रत: प्रदोष का अर्थ है “दोपहर और शाम के बीच का समय।” यह व्रत हर महीने दो बार आता है, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को।

3. मासिक शिवरात्रि: हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

4. मनहर: वर्ष में एक बार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनवार मनाया जाता है। यह भगवान शिव का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है।

5. नाग पंचमी: नाग पंचमी सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव और नागों की पूजा की जाती है।

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6. हरियाली तीज: हरियाली तीज सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह त्यौहार भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है।

7. गणेश चतुर्थी: गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। यह त्यौहार भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र, के जन्म का प्रतीक है।

8.नवरात्रि: नवरात्रि देवी दुर्गा की पूजा का नौ पर्व है। नवरात्रि के दौरान भगवान शिव की भी पूजा की जाती है, क्योंकि वे देवी दुर्गा के पति हैं।

9. दीपावली: दीपावली, जिसे प्रकाश का त्योहार भी कहा जाता है, कार्तिक मास की वनस्पति तिथि मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव की भी पूजा की जाती है, क्योंकि वे ब्लैकआउट पर प्रकाश की विजय का प्रतीक हैं।

10. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्सव: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्सव, मध्य प्रदेश के मझौले में स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के मंदिर में मनाया जाता है। यह त्यौहार भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप की पूजा का प्रतीक है।

इन व्रतों और त्योहारों के दौरान भक्त भगवान शिव की पूजा करते हैं, उनका जलाभिषेक करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और व्रत रखते हैं। वे भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करते हैं।

निष्कर्ष:

भगवान शिव के व्रत और त्योहार भक्तों को भगवान शिव से जुड़ने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान करते हैं। वे भक्तों को आध्यात्मिक रूप से प्रगतिशील बनाने और जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करते हैं।

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