भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है?

By adarsh

Published on:

भगवान शिव हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें कई नामों से जाना जाता है, जिनमें से एक है नीलकंठ। नीलकंठ का अर्थ है “नीला गला”। भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं।

पहली कथा:

समुद्र मंथन के दौरान, जब देवता और असुर अमृत प्राप्त करने के लिए मंथन कर रहे थे, तब समुद्र से कई अद्भुत चीजें निकलीं। इनमें से एक था हलाहल नामक विष। यह विष इतना शक्तिशाली था कि यह पूरी सृष्टि को नष्ट कर सकता था।

देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे इस विष को पीकर सृष्टि को बचाएं। भगवान शिव ने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार कर ली और उन्होंने विष को पी लिया। विष का प्रभाव इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव का गला नीला हो गया।

दूसरी कथा:

एक बार, भगवान शिव ने रावण को वरदान दिया था कि कोई भी देवता उसे पराजित नहीं कर पाएगा। रावण इस वरदान से घमंडी हो गया और उसने देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया।

देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे रावण को पराजित करें। भगवान शिव ने रावण के साथ युद्ध किया और उसे पराजित कर दिया। युद्ध के दौरान, रावण ने भगवान शिव पर कई शक्तिशाली अस्त्रों का प्रयोग किया। इनमें से एक अस्त्र भगवान शिव के गले में लग गया।

photo1706449955

इस अस्त्र के प्रभाव से भगवान शिव का गला नीला हो गया।

तीसरी कथा:

एक बार, भगवान शिव ने एक राक्षस का वध किया था। राक्षस के मरने पर, उसकी आत्मा भगवान शिव के शरीर में प्रवेश कर गई। भगवान शिव ने राक्षस की आत्मा को अपने गले में रोक लिया।

राक्षस की आत्मा के प्रभाव से भगवान शिव का गला नीला हो गया।

निष्कर्ष:

भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहा जाता है, इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं। इन कथाओं से भगवान शिव की शक्ति और करुणा का पता चलता है।

नीलकंठ नाम का महत्व:

नीलकंठ नाम का महत्व कई तरह से समझा जा सकता है।

  • नीला रंग आकाश का प्रतीक है। भगवान शिव को नीलकंठ कहकर यह दर्शाया जाता है कि वे सृष्टि के रक्षक हैं।
  • नीला रंग विष का भी प्रतीक है। भगवान शिव को नीलकंठ कहकर यह दर्शाया जाता है कि वे विष का नाश करने वाले हैं।
  • नीला रंग शांति का भी प्रतीक है। भगवान शिव को नीलकंठ कहकर यह दर्शाया जाता है कि वे शांति के देवता हैं।
भगवान शिव की पूजा:

भगवान शिव को नीलकंठ नाम से भी पूजा जाता है। सावन के महीने में, भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में, भक्त भगवान शिव को जल चढ़ाते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

adarsh

Leave a Comment