भविष्यमालिका – प्रथम अध्याय

By adarsh

Published on:

bhavisymalika
कलियुग का अंत

सृष्टि के आरंभ से ही, समय का चक्र अनवरत रूप से घूमता रहा है। सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग – ये चार युग एक क्रम में आते हैं और फिर कलियुग के अंत में, सृष्टि का नवीन निर्माण होता है।

कलियुग का अंत निकट है। अधर्म का बोलबाला बढ़ रहा है, और धर्म कमजोर पड़ रहा है। चारों ओर अशांति और हिंसा का माहौल है। लोग स्वार्थी और लालची हो गए हैं। वे केवल अपने सुखों के बारे में सोचते हैं, और दूसरों की परवाह नहीं करते हैं।

भविष्यमालिका

भविष्यमालिका एक ऐसी पुस्तक है जो भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन करती है। यह पुस्तक 500 वर्ष पहले संत अच्युतानंद दास द्वारा लिखी गई थी। उन्होंने अपनी योग शक्ति के बल पर भविष्य को देखा था और उसका वर्णन इस पुस्तक में किया था।

भविष्यमालिका के अनुसार, कलियुग के अंत में कई भयानक घटनाएं होंगी। प्राकृतिक आपदाएं आएंगी, और युद्ध होंगे। कई लोग मारे जाएंगे, और दुनिया तबाह हो जाएगी।

महाविनाश

कलियुग के अंत में, एक महाविनाश होगा। इस विनाश में, दुनिया के अधिकांश लोग मारे जाएंगे। केवल वे लोग बचेंगे जो धार्मिक और सदाचारी हैं।

bhavisymalika

नए युग का आरंभ

महाविनाश के बाद, एक नए युग का आरंभ होगा। यह युग सतयुग होगा, जिसमें सुख, शांति और समृद्धि होगी। लोग धार्मिक और सदाचारी होंगे, और वे प्रेम और भाईचारे के साथ रहेंगे।

भविष्यमालिका का महत्व

भविष्यमालिका हमें कलियुग के अंत में होने वाली घटनाओं के बारे में चेतावनी देती है। यह हमें सदाचारी जीवन जीने और धर्म का पालन करने के लिए प्रेरित करती है।

प्रथम अध्याय का सार

प्रथम अध्याय में, कलियुग के अंत का वर्णन किया गया है। अधर्म का बोलबाला बढ़ रहा है, और धर्म कमजोर पड़ रहा है। चारों ओर अशांति और हिंसा का माहौल है। लोग स्वार्थी और लालची हो गए हैं।

अगले अध्याय में

अगले अध्याय में, भविष्यमालिका में वर्णित भयानक घटनाओं का वर्णन किया जाएगा।

adarsh

Leave a Comment