Hanuman Chalisa Hindi Lyrics PDF Download

By adarsh

Updated on:

Hanuman Chalisa Hindi Lyrics

Picsart 23 12 30 21 08 41 577

 

श्रीगुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि |
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ||

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार |
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार ||

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर |
जय कपीस तिहुँलोक उजागर ||

रामदूत अतुलित बलधामा |
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा ||

महाबीर बिक्रम बजरंगी |
कुमति निवार सुमति के संगी ||

कंचन बरन बिराज सुबेसा |
कानन कुण्डल कुँचित केसा ||

हाथ बज्र औ ध्वजा विराजै |
काँधे मूँज जनेउ साजै ||

शंकर सुवन केसरीनंदन |
तेज प्रताप महा जग वंदन ||

विद्यावान गुनी अति चातुर |
राम काज करिबे को आतुर ||

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया |
राम लखन सीता मन बसिया ||

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा |
विकट रूप धरि लँक जरावा ||

भीम रूप धरि असुर संहारे |
रामचंद्र के काज सवारे ||

लाय सजीवन लखन जियाये |
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ||

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई |
तुममम प्रिय भरतहि सम भाई ||

सहस बदन तुम्हरो यश गावैं |
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ||

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा |
नारद सारद सहित अहीसा ||

जम कुबेर दिगपाल जहां ते |
कबि कोबिद कहि सके कहां ते ||

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा |
राम मिलाय राज पद दीन्हा ||

तुम्हरो मन्त्र विभीषण माना |
लंकेश्वर भए सब जग जाना ||

जुग सहस्र जोजन पर भानू |
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ||

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही |
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ||

दुर्गम काज जगत के जेते |
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ||

राम दुआरे तुम रखवारे |
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ||

सब सुख लहै तुम्हारी सरना |
तुम रक्षक काहू को डर ना ||

आपन तेज सम्हारो आपै |
तीनों लोक हांक ते कापै ||

भूत पिसाच निकट नहिं आवै |
महाबीर जब नाम सुनावै ||

नासै रोग हरै सब पीरा |
जपत निरंतर हनुमत बीरा ||

संकट तें हनुमान छुड़ावै |
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ||

सब पर राम तपस्वी राजा |
तिनके काज सकल तुम साजा ||

और मनोरथ जो कोई ल

ावै |
सोई अमित जीवन फल पावै ||

चारों जुग परताप तुम्हारा |
है परसिद्ध जगत उजियारा ||

साधु संत के तुम रखवारे |
असुर निकंदन राम दुलारे ||

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता |
अस बर दीन जानकी माता ||

राम रसायन तुम्हरे पासा |
सदा रहो रघुपति के दासा ||

तुम्हरे भजन राम को पावै |
जनम जनम के दुख बिसरावै ||

अंत काल रघुवर पुर जाई |
जहां जन्म हरिभक्त कहाई ||

और देवता चित्त न धरई |
हनुमत सेई सर्व सुख करई ||

संकट कटै मिटै सब पीरा |
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ||

जैसे कींचि लंक जारि |
जाहि यहाँ हनुमत बल भारी ||

सीता राम के परम भक्त |
बड़े भगत की अरज करत ||

आपने तनु शितल करना |
रघुपति की बरसन दीना ||

तुम्हरो यश सितिहिं के गावैं |
जननी जनक सुत पठावैं ||

सनकादिक आरती उतारी |
जैकी रहि भव भय निवारी ||

दुष्टदलन रघुनाथ कलाका |
कृपासिंधु रिपु मगवांकला ||

जय जय जय हनुमान गोसाईं |
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ||

जो सत बार पाठ कर कोई |
छूटहि बंदि महा सुख होई ||

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा |
होय सिद्धि साखी गौरीसा ||

तुलसीदास सदा हरि चेरा |
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ||

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप |
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ||

हनुमान अष्टक: भगवान हनुमान की महिमा और पूजा

Why Lord Shiva Smokes Weed

adarsh

Leave a Comment