कैसे होगा कलयुग का अंत, क्या सच में हो जायेगा विनाश, जाने 2 कारण ?

By Romil Pandey

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कैसे होगा कलयुग का अंत, क्या सच में हो नाश ?जायेगा वि

कलयुग का अंत :- 

कैसे होगा कलयुग का अंत, क्या सच में हो नाश ?जायेगा वि

कलयुग का अंत, कलयुग के अंत बारे में अन्य धर्मों में भी विभिन्न विचार हो सकते हैं। जैन धर्म में, कलयुग के अंत को समय चक्र के अंत के रूप में देखा जाता है, जब सारे जीवों की दृढ़ता, पवित्रता और धर्मदीप्ति गायब होती है। बौद्ध धर्म में, बड़ी महाप्रलय के बाद सबसे उच्च और परिपूर्ण धर्म का अवतारानुग्रह होगा। हिन्दू धर्म में, कलयुग के अंत पर भगवान कल्कि अवतार के रूप में जन्म लेंगे और श्रेष्ठ युग की शुरुआत की जाएगी। ये विचार धार्मिक ग्रंथों और आध्यात्मिक प्रतिष्ठानों के आधार पर हैं।

 

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हिन्दू धर्मं के अनुसार कलयुग का अंत :-

कलयुग का अंत ,हिन्दू धर्म में, कलयुग के अंत पर भगवान कल्कि अवतार का जन्म “शंक्यायन” नामक पितार्थ (अनर्थ) संकेत के साथ होगा। इसके अनुसार, उनका जन्म माता यशोदा के गर्भ से होगा और वे गोकुल में नंद बाबा और यशोदा माता के यहां पालन-पोषण में बड़े होंगे। वे अद्वैत धर्म, ध्यान और वैराग्य को प्रचार करेंगे और आध्यात्मिक गुरु के रूप में कार्य करेंगे। इनकी आविर्भाव तिथि और विचारों का विवरण भगवद्गीता, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण और अन्य पुराणों में मिलता है। समय और उनके आविर्भाव के तारीख के बारे में निश्चितता के बावजूद, उनके आगमन से पूर्व उपसंहार और संकेतों के माध्यम से प्रतिष्ठानों में न्यूनतम आवधि बताई गई है।

भगवान् कल्कि का आविर्भाव कलयुग के अंत में होगा :-
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कलयुग का अंत :- हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि भगवान कल्कि का आविर्भाव कलयुग के अंत पर ही होगा। यह उस समय ही होना आवश्यक है जब कलयुग की दुष्कृति और अधर्म अधिकता प्राप्त कर लेते हैं और धर्मिकता शीघ्रतापूर्वक कम हो जाती है। हिन्दू धर्म के अनुसार, भगवान कल्कि अवतार उद्यम, सुषम, विस्तारी शास्त्री, और आध्यात्मिक ज्ञान के समर्पित होंगे और उनका प्रधान कार्य धर्मी लोगों को मार्गदर्शन करना होगा। बतौर मान्यता, कलियुग के अंत पर ही भगवान कल्कि का आविर्भाव होना आवश्यक है।

कैसे होगा कलयुग का विनाश :-

कलयुग का अंत :- हिन्दू धर्म में निर्दिष्ट तरीके से विवरणित नहीं किया गया है। हालांकि, कलयुग का विनाश सदाचारी और आध्यात्मिकता की कमी, अधर्म और दुष्कृति की वृद्धि के कारण होगा। शास्त्रों में कहा जाता है कि कलयुग का अधिपति होने वाले व्यक्ति महाबली शिव के अनुयायी होंगे और वे ब्रह्माण्ड के नष्ट होने का कारण बन सकते हैं।

कलयुग का विनाश ब्रह्मांड के साठ लाख महायुगों (संकेत में ‘महाकल्प’ कहा जाता है) की संख्या के बाद होगा। इसमें दिव्य और पूर्व प्राप्त शक्तियों की पूर्ण उपयोगिता के बाद ही इस विनाश का आनंदित समय आएगा। यह विनाश परलोकी समयगत होगा और केवल ईश्वर का ज्ञान प्राप्त व्यक्ति उसे अनुभव करेगा। इसके अलावा, कलयुग का विनाश और उसकी विवरणित कारणों को लेकर भिन्न-भिन्न धारणाएं और प्रकार हो सकते हैं जो विभिन्न शास्त्रों और धार्मिक ग्रंथों में उपलब्ध हैं।

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क्या कलयुग के विनाश के बाद आएगा एक नया युग :-

कलयुग का अंत, हिन्दू धर्म में मान्यता है कि कलयुग के विनाश के बाद एक नया युग प्रारंभ होगा, जिसे सत्ययुग कहा जाता है। सत्ययुग धार्मिकता, सदाचार, सत्य, और शुद्धता का युग होता है। इस युग में मानव और प्रकृति का सामंजस्य होता है और लोग आध्यात्मिकता के ऊंचे स्तर पर जीने का प्रयास करते हैं। इस युग में अंतर्ज्ञान, भक्ति, और सबकी सेवा का महत्व मान्यता होता है।

कलयुग का अंत, सत्ययुग के बाद अयोध्यायुग, त्रेतायुग, और द्वापरयुग आएंगे, जो कलयुग के पूर्ववर्ती युग होते हैं। इन युगों में धार्मिकता की कमी और अधर्म की वृद्धि होती है। प्रत्येक युग की अवधि आयोध्यायुग में 1,296,000 वर्ष होती है, त्रेतायुग में 864,000 वर्ष, और द्वापरयुग में 432,000 वर्ष। यथार्थ युग चक्र के अंत में कलयुग फिर से प्रारंभ होता है। इस प्रकार, युगों की सतत प्रवृत्ति चलती रहती है जब तक चक्र निरंतर चलता रहता है।

कैसे हम सत्ययुग के ऊँचे स्तर पर जी सकते ?


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कलयुग का अंत,

  1. सत्ययुग के ऊँचे स्तर पर जीने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रयास किए जा सकते हैं। यहाँ कुछ सुझाव हैं:
  2. आध्यात्मिक अभ्यास: नियमित ध्यान, मेधावी अभ्यास और योग के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक साधना को मजबूत करें। यह आपको मेंशिप, सत्वगुण, और आत्मज्ञान में सुधार करके सत्ययुग के ऊँचे स्तर पर पहुंचने में मदद करेगा।
  3. सत्य का पालन करें: अपने जीवन में सत्य का पालन करें। इसमें बातचीत में सत्यवचन का पालन, ईमानदारी, न्यायपूर्णता, और निष्काम कर्म में पालन शामिल होता है।
  4. सदाचार की सेवा करें: सामाजिक सेवा और निःस्वार्थ सेवा करें ताकि आप दूसरों के भलाई के लिए योगदान दे सकें। यह आपको सत्ययुग के आदर्शों के साथ जीने में मदद करेगा।
  5. अहिंसा का पालन करें: अहिंसा का मानव और प्राणियों के प्रति सम्मान और प्यार के साथ पालन करें। अहिंसा को अपनी सोच, भाषा, और कार्य में शामिल करें और एक अहिंसामय और शांतिपूर्ण वातावरण सृजित करें।
  6. ज्ञान का अध्ययन करें: सत्ययुग के ऊँचे स्तर में पहुंचने के लिए ज्ञान का अध्ययन करें। साहित्य, धार्मिक ग्रंथ, और पुराणों की पढ़ाई करें ताकि आप ज्ञान का संग्रह कर सकें और आध्यात्मिक विज्ञान में गहराई तक पहुंच सकें।

यदि हम इन प्रयासों पर ध्यान देते हैं, तो हम सत्ययुग के ऊँचे स्तर पर अपने जीवन को जी सकते हैं। यह           ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह प्रयास धीरे-धीरे स्थिरता और संतुलन के साथ होना चाहिए और हर                   व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है।

 

 

Romil Pandey

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