कर्ण पिशाचिनी विद्या क्या है?

By adarsh

Published on:

कर्ण पिशाचिनी विद्या एक शक्तिशाली तंत्र साधना है, जिसमें साधक किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए पिशाचिनी शक्ति का उपयोग करता है। इस साधना की सिद्धि के बाद साधक किसी भी व्यक्ति के बारे में उसकी इच्छानुसार जानकारी प्राप्त कर सकता है, चाहे वह व्यक्ति वर्तमान में कहाँ है, क्या कर रहा है, उसके भविष्य में क्या होने वाला है, आदि।

कर्ण पिशाचिनी विद्या का इतिहास

कर्ण पिशाचिनी विद्या की उत्पत्ति प्राचीन काल में हुई थी। इस विद्या का उल्लेख कई पुराणों और ग्रंथों में मिलता है। कहा जाता है कि महाभारत के नायक कर्ण ने भी इस विद्या का अभ्यास किया था। कर्ण के पास एक पिशाचिनी थी, जिसका नाम था “अतिका”। कर्ण अतिका की मदद से अपने शत्रुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करता था।

photo1705766662

कर्ण पिशाचिनी विद्या की सिद्धि

कर्ण पिशाचिनी विद्या की सिद्धि के लिए साधक को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:

  • साधक को एकांत स्थान पर एक चौकी स्थापित करनी चाहिए।
  • चौकी पर एक तांबे का पात्र रखना चाहिए।
  • पात्र में गाय का शुद्ध घी भरना चाहिए।
  • घी में एक त्रिशूल बनाना चाहिए।
  • त्रिशूल के ऊपर कर्ण पिशाचिनी का मंत्र जपना चाहिए।
  • मंत्र जप करते समय साधक को अपने मन में उस व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए, जिसके बारे में वह जानकारी प्राप्त करना चाहता है।

कर्ण पिशाचिनी विद्या की सिद्धि के लिए साधक को नियमित रूप से मंत्र जप करना चाहिए। यदि साधक नियमित रूप से मंत्र जप करता है, तो उसे 11 दिनों के अंदर सिद्धि प्राप्त हो जाती है।

कर्ण पिशाचिनी विद्या के लाभ

कर्ण पिशाचिनी विद्या के निम्नलिखित लाभ हैं:

  • इस विद्या से साधक किसी भी व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।
  • इस विद्या का उपयोग साधक अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए भी कर सकता है।
  • इस विद्या का उपयोग साधक अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए भी कर सकता है।
कर्ण पिशाचिनी विद्या के नुकसान

कर्ण पिशाचिनी विद्या का उपयोग करते समय साधक को निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • इस विद्या का उपयोग केवल अच्छे कार्यों के लिए ही करना चाहिए।
  • इस विद्या का उपयोग किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं करना चाहिए।
  • यदि साधक इस विद्या का उपयोग गलत तरीके से करता है, तो उसे नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कर्ण पिशाचिनी विद्या का उपयोग कैसे करें?

कर्ण पिशाचिनी विद्या का उपयोग करने के लिए साधक को निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए:

  • साधक को अपनी इच्छानुसार मंत्र जप करना चाहिए।
  • मंत्र जप करते समय साधक को अपने मन में उस व्यक्ति के बारे में सोचना चाहिए, जिसके बारे में वह जानकारी प्राप्त करना चाहता है।

यदि साधक सही तरीके से मंत्र जप करता है, तो उसे उस व्यक्ति के बारे में जानकारी प्राप्त हो जाएगी।

कर्ण पिशाचिनी विद्या की सावधानियां

कर्ण पिशाचिनी विद्या एक शक्तिशाली विद्या है। इस विद्या का उपयोग करते समय साधक को निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना चाहिए:

  • इस विद्या का उपयोग केवल अच्छे कार्यों के लिए ही करना चाहिए।
  • इस विद्या का उपयोग किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं करना चाहिए।
  • यदि साधक इस विद्या का उपयोग गलत तरीके से करता है, तो उसे नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
कर्ण पिशाचिनी विद्या का उपयोग करने के लिए किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेना आवश्यक है।

adarsh

Leave a Comment