शंकराचार्य के चयन के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं

By adarsh

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शंकराचार्य का चयन एक जटिल और पारंपरिक प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया चार मठों के प्रमुखों, आचार्य महामंडलेश्वरों, प्रतिष्ठित संतों की सभा और काशी विद्वत परिषद की सहमति से होती है।

शंकराचार्य के चयन के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं:

  • संन्यासी होना
  • ब्राह्मण होना
  • चारों वेदों और छह वेदांगों का पारंगत ज्ञान होना
  • शास्त्रार्थ और दर्शन में निपुण होना
  • चरित्र और आचार-विचार में उत्कृष्ट होना

चयन प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:

  1. पहले, प्रत्येक मठ अपने सबसे योग्य संन्यासी को शंकराचार्य के लिए नामांकित करता है।
  2. इसके बाद, सभी चार मठों के प्रमुख, आचार्य महामंडलेश्वर और प्रतिष्ठित संतों की सभा एकत्रित होकर एक समिति का गठन करती है।
  3. यह समिति नामांकित उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेती है और उनका शास्त्रार्थ करती है।
  4. समिति अंततः सर्वसम्मति से एक उम्मीदवार का चयन करती है।
  5. चयनित उम्मीदवार का नाम काशी विद्वत परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
  6. काशी विद्वत परिषद भी इस चयन की पुष्टि करती है।

एक बार चयन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, चयनित उम्मीदवार को शंकराचार्य के रूप में अभिषेक किया जाता है।

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शंकराचार्य के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए, कुछ सुधारों की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चयन समिति में सभी मठों का प्रतिनिधित्व हो। इसके अलावा, चयन समिति को एक अधिक आधुनिक और पारदर्शी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

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