Shiv तांडव स्तोत्र: रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र

By adarsh

Published on:

Shiv तांडव

Shiv तांडव स्तोत्र के प्रमुख पंक्ति

1. जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥

2. जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम॥

3. दरिद्दरिद्दरिद्दरिद्दमन्निरिक्कुरुः कुरुः
कुरुः कुरुः कुरुः कुरुः कुरुः कुरुः कुरुः।
इति दृष्टवा कथं वा न खलु सुखं न जायते
जगदेकपते त्रिलोचन त्रिनयन त्रिजगत्पते॥

Shiv तांडव स्तोत्र: रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र

ये कुछ पंक्तियाँ हैं जो Shiv तांडव स्तोत्र के प्रमुख भाग हैं। इन पंक्तियों में Shiv की महिमा, उनके रूपों का वर्णन और उनकी शक्ति का गुणगान किया गया है। यह स्तोत्र शिव के भक्तों के द्वारा उनकी पूजा और भक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है।

Shiv तांडव स्तोत्र का महत्व क्या है?

शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव की महिमा और महाकाली शक्ति की प्रशंसा करने वाला एक प्रमुख स्तोत्र है। इस स्तोत्र में शिव के गुणों, शक्तियों और रूपों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र शिव के भक्तों द्वारा प्रतिदिन या विशेष अवसरों पर पाठ किया जाता है। इसका पाठ करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है और भक्त को आनंद, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह स्तोत्र शिव भक्ति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा, शिव तांडव स्तोत्र का सुनना और पाठ करना मन को शांत करता है और उसे नए ऊर्जा का अनुभव होता है। इस स्तोत्र का पाठ करने से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है और भक्त को शिव के साथ एकात्मता का अनुभव होता है।

Shiv तांडव स्तोत्र के अलावा शिव की कौन-कौन सी प्रतिमाएं होती हैं?

Shiv की कई प्रतिमाएं होती हैं, जो उनके विभिन्न रूपों और अवतारों को प्रतिष्ठित करती हैं। यहां कुछ प्रमुख शिव प्रतिमाएं हैं:

  • नटराज: नटराज शिव का एक प्रमुख रूप है, जिसमें वे नृत्य करते हुए दिखाई देते हैं। इस प्रतिमा में शिव के चारों हाथों में वामन, वरद, अभय और दमरु होते हैं।
  • लिंगमूर्ति: लिंगमूर्ति शिव की प्रमुख प्रतिमा है, जिसमें शिव का लिंग दिखाई देता है। यह प्रतिमा शिव की अद्वैत और निराकार स्वरूप को प्रतिष्ठित करती है।
  • अर्धनारीश्वर: अर्धनारीश्वर शिव का एक विशेष रूप है, जिसमें वे पुरुष और स्त्री के संयोग को दर्शाते हैं। इस प्रतिमा में शिव का दाहिना हाथ त्रिशूल और बायां हाथ पर्वती के साथ होता है।
  • रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग: रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु, भारत में स्थित है और शिव की प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
  • केदारनाथ मंदिर: केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड, भारत में स्थित है और यह शिव का प्रमुख तीर्थस्थान है। यहां पर शिव की प्रतिष्ठा है और भक्तों की भक्ति का केंद्र है

ये कुछ प्रमुख Shiv प्रतिमाएं हैं, जो उनके भक्तों द्वारा पूजी जाती हैं और उनकी महिमा का प्रतीक हैं।

क्या और भी कोई प्रमुख शिव प्रतिमाएं हैं जो भारत के बाहर स्थानित हैं?

हाँ, भारत के बाहर भी कई प्रमुख Shiv प्रतिमाएं स्थानित हैं। यहां कुछ उनमें से कुछ प्रमुख शिव प्रतिमाएं हैं:

  • प्रमुख Shiv मंदिर, नेपाल: पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू, नेपाल में स्थित है और यह शिव का प्रमुख तीर्थस्थान है। यहां पर Shiv की प्रतिष्ठा है और भक्तों की भक्ति का केंद्र है।
  • अंग्कोर वाट, कंबोडिया: अंग्कोर वाट, कंबोडिया में स्थित है और यह विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। इसमें Shiv की प्रतिष्ठा है और यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।
  • महादेव मंदिर, इंदोनेशिया: महादेव मंदिर, प्रंबानन, इंदोनेशिया में स्थित है और यह Shiv की प्रतिष्ठा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • ब्रिसबेन महादेव मंदिर, ऑस्ट्रेलिया: ब्रिसबेन महादेव मंदिर, ऑस्ट्रेलिया में स्थित है और यह Shiv की प्रतिष्ठा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह भारतीय संस्कृति और धर्म को प्रमोट करने का एक महत्वपूर्ण स्थान है।

ये कुछ उन प्रमुख Shiv प्रतिमाओं में से हैं जो भारत के बाहर स्थानित हैं। ये स्थान Shiv भक्तों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं और उन्हें Shiv की प्रतिष्ठा का अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं।

adarsh

Leave a Comment