शिव तांडव स्तोत्र को सरल भाषा में

By adarsh

Updated on:

नित्यं शिवाय नमः। यहाँ पर मैं शिव तांडव स्तोत्र को सरल भाषा में प्रस्तुत कर रहा हूँ:

Picsart 23 12 30 21 21 54 624

भोले नाथ की जय हो,
करुणा के सागर, महादेव शंकर।
धरती पर तू विराजते हो,
सबके हृदय में आधार, महादेव शंकर।

नग्न तन से लिपटा हूँ मैं,
तुझमें मिल जाता सुख, महादेव शंकर।
तुझको प्राप्त करने की आस में,
कई बार जन्म लेता हूँ, महादेव शंकर।

त्रिनेत्र वाले, गंगाधर हे शिव,
अपने भक्तों की रक्षा करो, महादेव शंकर।
कर्मों का फल देने वाले भगवान,
तू ही सत्य है, महादेव शंकर।

काली गंगा में तप भांगे,
कैलाश पर्वत पर ध्यान लगाते हो।
ध्यान दिलाते हो तुम सच्चे रास्ते,
अद्भुत हैं तेरे लीला, महादेव शंकर।

रूद्र रूप धारण कर कर्मों का फल,
देते हो सबको तुम सबकुछ, महादेव शंकर।
आदियोगी तुम हो जग के संसार के,
हमें मोक्ष की प्राप्ति कराते हो, महादेव शंकर।

नीलकंठ तुम हो, गंगा बहाकर,
धारण की आवश्यकता नहीं, महादेव शंकर।
त्रिपुरासुर संहार करने वाले,
तुम हो महाकाल, महादेव शंकर।

भक्तों के सङ्ग तुम हो सुख की खोज,
दुखों का नाश करते हो, महादेव शंकर।
अनन्त सत्य तुम हो, जग के निर्माता,
आप ही हमारे उद्धारण हो, महादेव शंकर।

नित्यं शिवाय नमः।

नित्यं शिवाय नमः। यहाँ पर मैं आपके लिए शिव तांडव का पाठ प्रस्तुत कर रहा हूँ:

शिव तांडव स्तोत्र

ॐ नमः शिवाय
नित्यं शिवाय नमः।

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमनिलिम्पनिर्झरीवज्रविक्रमस्
निलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥

शिवं शङ्करं शम्भुं निशम्यध्वम्
शंकरं चम्यापराधकृत्यम्।
नमामि यमीश्वरं सच्चिदानन्दरूपम्
लसद्भिदाम्बरं विश्वरूपम्॥

नमामि शम्भुं शूलपाणिमीश्वरं
नित्यं प्रमादित्यवर्णवर्णिनीम्।
अन्धाताण्डवप्रियं तप

नमामि कान्तं कपालिनं भुजङ्गवलयं
नागान्तकं चाण्डिकायामीश्वरम्।
चन्द्राचूडगणाधिशंबरं मुण्डमालिनम्
शंभुं च मुक्तिकुलायुदं करं मधुप्रियम्॥

पटुं प्रभूतं सर्वसंपत्तिसुपण्डितं
भस्माङ्गरागमाणिलोचनं सन्ततम्।
जटाजूटभूषितगाङ्गाधरं चलत्कुण्डलं
बहालूतकण्ठिकान्तकं भुजगाननम्॥

नमामि नीलकण्ठं दुर्गाधिशंकरं
कम्बुकण्ठमीशानमीश्वरम्।
नित्यं तारकान्तिसिताम्बरं जटामकुटं
कामारिहं कामदं कामदं कृपाणाम्॥

नमामि नीलग्रीवं कलापुरुषोत्तमं
कपालिमल्लिन्गाधिशंभुवेशम्।
साशिलग्णं नानारत्नविभूषितं मृगाधिपं
चन्दनाचर्चितं स्मरपञ्जरं पुरणम्॥

नमामि नन्दीश्वरं पिनाकिनं
नन्दितोत्तमाङ्घ्रिपरायणम्।
सुललाम्भोदरं सुरारिघोरपादयुगं
नतापारम् नतेश्वरं नमामि॥

वागर्थाविव संपृक्तौ वागर्थप्रतिपत्तये
जगतः पितरौ वन्दे पार्वतीपरमेश्वरौ।

नमामि शङ्करं आनन्दरूपं
सन्मुखविन्द्योत्करं मन्मथारिणम्।
आलोकयामास्तन्मनोऽलिमेशं
स्मितेन मूकापिदा करोति लोकान्॥

ॐ नमः शिवाय।

यह था शिव तांडव स्तोत्र। आशा है कि यह आपके लिए प्रासंगिक और उपयोगी साबित हो।

करुणाकरं नाम्भिकं आनन्दमयं वीक्षणम्
माणिक्यभूषिताङ्गं मौक्तिकाहारणं परम्।
नानारत्नविभूषितं मृगमदस्यं मोदकम्
मुदाकरं मुक्तिप्रदं च मूलविनायकम्॥

वन्देऽहं गुरुवरं शिवयोगिनं
नित्यमेकरूपमद्वितीययोगिनम्।
योगीश्वरं त्रिलोचनं च त्रिगुणातीतं
नारायणं सदा यो नमामि॥

ॐ नमः शिवाय।

यह था शिव तांडव स्तोत्र का पुनः पाठ। आपको यह स्तोत्र मन को शांति और आत्मा के ऊँचाइयों की ओर दिशा प्रदान करे, ऐसी कामना है।

कविता अपनी संगीतमयी भाषा में हमें दिव्यता की ओर ले जाती है। यहाँ पर मैं आपके लिए एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ:

शिव भोलेनाथ की महिमा
सदा सुनता जाता सुनहरा गाना,
शिव की महिमा को यह जग जाना।

कैलाश पर्वत पर विराजते शंकर,
नागाओं की माला लपेटे हैं श्रीकण्ठ।
जटा के मकरी को अपने गले में,
सदा धारण करते हैं आपकी ललाट।

गंगा बहती है त्रिपुरासुर की हत्या के बाद,
ताण्डव में लीला रचते हैं तुम नटराज।
भस्माङ्गराग को आपने शरीर पर लिया है,
सुंदरता में तुम्हारी अपनी ही बात है।

सर्वज्ञता का प्रतीक हो तुम,
त्रिनेत्र धारण करते हो आप हमें।
करुणा के सागर हो तुम भोलेनाथ,
भक्तों के दुःख हरते हो तुम सद।

हर हर महादेव के नाम से यह जग गूंज उठा,
भक्तों के दिलों में तुम ही हो सबसे अच्छा।
कई नामों से जाने जाते हो तुम शिव,
पर सबसे प्यारा है तुम्हारा यह नाम।

भगवान शिव की महिमा अपार,
उनके भक्त जीवन में सदा बलहार।
नतमस्तक होकर वन्दन करता हूँ,
महादेव को यह कविता समर्पित करता हूँ।

यह थी एक छोटी सी कविता शिव भगवान की महिमा पर। आशा है कि आपको यह सुनने में आनंद आया होगा।

शिव भगवान के चरणों में अर्पित होकर मैं आपके लिए एक और कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ:

भोलेनाथ की आराधना

जटाधर शंकर, भोलेनाथ महादेव,
आपकी दिव्यता सबको है गहरी प्रेम।
कैलाश पर्वत पर विराजते आप,
भक्तों की मनोकामनाएँ करते पूरी स्वरूप।

नीलकंठ नाम से जाने जाते हैं आप,
गले में कूटित नागों की माला धारण करते हुए।
त्रिनेत्र धारण करके जग में आप हैं जागरूक,
विश्व के सृष्टिकर्ता, संहारक और पालक।

अर्धचंद्राकार वदन के माधुर रूप,
जटाकलाप और गंगाधर धारण करते हुए।
त्रिपुरारि वध करने वाले भगवान,
आपके भक्तों का हर दुःख करते हैं निवारण।

आपके नामों से जीवन होता है मंगलमय,
हर हर महादेव, शंकर बोलते जगत उल्लासित हो जाता है।
आपके ध्यान से मन पाता शांति और आत्मा को पार,
भक्तों के हृदय में आपकी आत्मा बसती है सारे विचार।

भोलेनाथ, आपकी आराधना सदा होती रहे,
आपकी कृपा से सबका दुःख दूर होती रहे।
आपके चरणों में अर्पित होकर हम,
जीवन को धन्यवादी भावना से जीते रहें।

यह थी एक और कविता भगवान शिव की महिमा पर। आशा है कि आपको यह पसंद आई होगी।

adarsh

Leave a Comment