SHIVRATRI क्यों मनाई जाती है

By adarsh

Published on:

SHIVRATRI क्यों मनाई जाती है

SHIVRATRI हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और लोग उनके लिए विभिन्न प्रकार के व्रत रखते हैं। इस दिन को SHIVRATRI कहा जाता है क्योंकि इस दिन रात्रि के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन को मनाने से मान्यता है कि भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और उनकी कृपा से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव की पूजा के लिए SHIVRATRI का खास महत्व क्या है?

SHIVRATRI का खास महत्व भगवान शिव की पूजा के लिए होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से उनकी कृपा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनकी आशीर्वाद से लोगों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन को रात्रि के समय भगवान शिव की पूजा करने से उनकी आशीर्वाद और कृपा प्राप्त होती है। इस दिन को मनाने से लोगों को शुभ फल मिलते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

SHIVRATRI का पूजन कैसे किया जाता है?

SHIVRATRI का पूजन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन यहां कुछ महत्वपूर्ण चरणों को बताया जा रहा है जो आमतौर पर अनुसरण किए जाते हैं:

  1. SHIVLING की स्थापना: पूजा की शुरुआत में एक SHIVLING की स्थापना की जाती है। SHIVLING को पूजनीय स्थान पर स्थापित करें।
  2. स्नान: SHIVRATRI के दिन भगवान शिव की पूजा से पहले स्नान करें। यह शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है।
  3. बेल पत्र, धूप, दीप, अर्चना: SHIVLING को बेल पत्र, धूप, दीप और अर्चना के साथ पूजें। इसके साथ ही शिव चालीसा, शिव मंत्र या शिव स्तोत्र का पाठ करें।
  4. फल, पुष्प और भोग: भगवान शिव को फल, पुष्प और भोग चढ़ाएं। इससे पूजा का अंग और भक्ति का अद्यात्मिक अनुभव होता है।
  5. जागरण: SHIVRATRI की रात्रि में जागरण का आयोजन करें। भजन, कीर्तन, आरती और SHIVLING की पूजा के साथ भगवान शिव की गुणगान करें।
  6. यह सामान्यतः अनुसरण किए जाने वाले चरण हैं, लेकिन आप अपनी आस्था और प्राथमिकताओं के अनुसार अन्य रीति-रिवाज भी अपना सकते हैं। ध्यान दें कि यह एक सामान्य विवरण है और आपके स्थानीय परंपराओं और आचार्यों के सलाह का पालन करना उचित होगा।

SHIVRATRI के दौरान पूजा के लिए कौन-कौन से मंत्र और स्तोत्र पढ़े जाते हैं?

SHIVRATRI के दौरान भगवान शिव की पूजा के लिए कई मंत्र और स्तोत्र पढ़े जाते हैं। यहां कुछ महत्वपूर्ण मंत्र और स्तोत्रों का उल्लेख किया जा रहा है:

  1. शिव मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है और इसे SHIVRATRI के दौरान जप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  2. महामृत्युंजय मंत्र: “ॐ हौं जूं सः भूर्भुवः स्वः त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्” यह मंत्र महामृत्युंजय मंत्र के रूप में जाना जाता है और इसे SHIVRATRI के दौरान जप करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।
  3. शिव तांडव स्तोत्र: यह स्तोत्र भगवान शिव की महिमा का वर्णन करता है और इसे SHIVRATRI के दौरान पढ़ने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  4. शिव चालीसा: शिव चालीसा भगवान शिव की महिमा का वर्णन करती है और इसे SHIVRATRI के दौरान पढ़ने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

ये कुछ महत्वपूर्ण मंत्र और स्तोत्र हैं जो SHIVRATRI के दौरान पढ़े जाते हैं। इसके अलावा भी आप अपनी आस्था और प्राथमिकताओं के अनुसार अन्य मंत्र और स्तोत्रों का जप कर सकते हैं।

क्या SHIVRATRI के दौरान पूजा का विधान कुछ विशेष तरीके से किया जाता है?

SHIVRATRI क्यों मनाई जाती है

SHIVRATRI के दौरान पूजा का विधान कुछ विशेष तरीके से किया जाता है। यहां कुछ महत्वपूर्ण तरीके बताए जा रहे हैं:

1. जलाभिषेक: SHIVRATRI के दौरान SHIVLING को जलाभिषेक किया जाता है। इसमें शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बिल्वपत्र, धूप, दीप आदि का उपयोग किया जाता है।

2. बेल पत्र, धूप, दीप, अर्चना: SHIVLING को बेल पत्र, धूप, दीप और अर्चना के साथ पूजा किया जाता है। इसके साथ ही शिव चालीसा, शिव मंत्र या शिव स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

3. फल, पुष्प और भोग: भगवान शिव को फल, पुष्प और भोग चढ़ाए जाते हैं। इससे पूजा का अंग और भक्ति का अद्यात्मिक अनुभव होता है।

4. जागरण: SHIVRATRI की रात्रि में जागरण का आयोजन किया जाता है। भजन, कीर्तन, आरती और SHIVLING की पूजा के साथ भगवान शिव की गुणगान की जाती है।

ये कुछ महत्वपूर्ण तरीके हैं जिनका अनुसरण करके SHIVRATRI के दौरान पूजा की जा सकती है। ध्यान दें कि ये एक सामान्य विवरण हैं और आपके स्थानीय परंपराओं और आचार्यों के सलाह का पालन करना उचित होगा।

SHIVRATRI पर SHIVLING की पूजा की क्या विधि होती है और कैसे की जाती है?

SHIVRATRI पर SHIVLING की पूजा की विधि निम्नलिखित तरीके से की जाती है:

1. स्नान: पूजा की शुरुआत में SHIVLING को स्नान कराया जाता है। इसके लिए शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बिल्वपत्र, धूप, दीप आदि का उपयोग किया जाता है।

2. त्रिपुंड्र: SHIVLING पर त्रिपुंड्र लगाना एक महत्वपूर्ण अंग है। त्रिपुंड्र बनाने के लिए भस्म या गंगाजल का उपयोग करें और इसे SHIVLING पर लगाएं।

3. बेल पत्र, धूप, दीप, अर्चना: SHIVLING को बेल पत्र, धूप, दीप और अर्चना के साथ पूजा किया जाता है। इसके साथ ही शिव चालीसा, शिव मंत्र या शिव स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

4. फल, पुष्प और भोग: भगवान शिव को फल, पुष्प और भोग चढ़ाए जाते हैं। इससे पूजा का अंग और भक्ति का अद्यात्मिक अनुभव होता है।

5. आरती: SHIVLING की पूजा के बाद आरती की जाती है। इसमें दीपक को घुमाकर आरती दी जाती है और भजन गाए जाते हैं।

ये कुछ महत्वपूर्ण तरीके हैं जिनका अनुसरण करके SHIVRATRI पर SHIVLING की पूजा की जा सकती है। ध्यान दें कि ये एक सामान्य विवरण हैं और आपके स्थानीय परंपराओं और आचार्यों के सलाह का पालन करना उचित होगा।

adarsh

Leave a Comment