श्री हनुमान गायत्री मंत्र

By adarsh

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हनुमान मंत्र: नौकरी के लिए

ॐ अंजनेयाय विद्महे
वायुपुत्राय धीमहि
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्

अर्थ

  • – ओम, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु और संहारकर्ता शिव का प्रतीक
  • अंजनेयाय – अंजनी के पुत्र, हनुमान
  • विदमहे – हम ध्यान करते हैं
  • वायुपुत्राय – वायु के पुत्र, हनुमान
  • धीमहि – हम समझते हैं
  • तन्नो – हमारे
  • हनुमत् – हनुमान
  • प्रचोदयात् – हमें प्रेरित करें
मंत्र का अर्थ

इस मंत्र में, भक्त हनुमान जी को गायत्री मंत्र के रूप में ध्यान करते हैं। वे हनुमान जी को अंजनी के पुत्र और वायु के पुत्र के रूप में पहचानते हैं। वे हनुमान जी से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें प्रेरित करें और उन्हें ज्ञान, बुद्धि और शक्ति प्रदान करें।

मंत्र का जाप कैसे करें

इस मंत्र का जाप किसी भी दिन, किसी भी समय किया जा सकता है। हालांकि, मंगलवार और शनिवार को इस मंत्र का जाप करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

मंत्र का जाप करने के लिए, एक शांत स्थान पर बैठें और अपनी आंखें बंद करें। हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठना भी अच्छा है। मंत्र को धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक दोहराएं। आप मंत्र का जाप 108 बार या अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं।

मंत्र का जाप करते समय, हनुमान जी पर अपनी श्रद्धा और विश्वास केंद्रित करें। यदि आपके मन में कोई इच्छा है, तो उसे हनुमान जी को बताएं।

मंत्र के लाभ

इस मंत्र का जाप करने से कई लाभ होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि
  • शक्ति और साहस में वृद्धि
  • कार्यों में सफलता
  • शत्रुओं पर विजय
  • आध्यात्मिक उन्नति

यदि आप हनुमान जी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस मंत्र का जाप करना एक अच्छा तरीका है।

श्री हनुमान गायत्री मंत्र

रावण का वध करना

रावण का वध करना एक पौराणिक कथा है जो हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह कथा रामायण महाकाव्य में वर्णित है, जो हिंदू धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है।

रावण एक राक्षस था जो लंका का राजा था। वह एक शक्तिशाली योद्धा और जादूगर था। उसने सीता का हरण किया था, जो भगवान राम की पत्नी थी। राम ने रावण को मारने और सीता को मुक्त करने के लिए एक लंबी यात्रा की थी।

राम और रावण के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। राम ने रावण को कई बार मारा, लेकिन रावण हर बार फिर से जीवित हो गया। अंत में, राम ने रावण की नाभि में एक अग्निबाण चलाया, जिससे रावण का वध हो गया।

रावण के वध का हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक अर्थ है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह सत्य और न्याय की जीत का प्रतीक है। यह यह भी दर्शाता है कि यदि कोई व्यक्ति दृढ़ संकल्प और साहस रखता है, तो वह किसी भी बाधा को पार कर सकता है।

रावण के वध की कथा हिंदू धर्म में कई तरह से मनाई जाती है। दशहरा के त्योहार पर, राम और रावण के बीच के युद्ध का मंचन किया जाता है। रावण का पुतला जलाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

रावण का वध एक ऐसी कथा है जो हिंदू धर्म के मूल्यों और विश्वासों को दर्शाती है। यह एक ऐसी कथा है जो पीढ़ियों से हिंदुओं को प्रेरित करती रही है।

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