राम स्तुति lyrics

दोहा: श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणं। नव कंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणं॥

चौपाई: १. नव नील नीरद सुन्दरं, नोमि जनक सुतावरं। दैत्य वंश निकन्दनं, चन्द दशरथ नन्दनं॥

२. चारु उदारु अंग विभूषणं, संग्राम जित खरदूषणं। शेष मुनि मन रंजनं, कामादि खलदल गंजनं॥ 

३. वर सहज सुन्दर सांवरो, स्नेह जानत रावरो। सहित हिय हरषित अली, मुदित मन मन्दिर चली॥ 

सोरठा: जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे॥

सोरठा: जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि। मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे॥

दोहा: श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणं। नव कंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणं॥