भक्ति

ये हैं कलयुग में भक्ति करने के 9 नियम ..

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1. नाम जप: कलयुग में भक्ति का सबसे सरल और प्रभावी साधन नाम जप है। 

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2. सत्संग: सत्संग का अर्थ है अच्छे लोगों की संगति। सत्संग से भक्ति भावना बढ़ती है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है। 

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3. दान: दान करने से पुण्य प्राप्त होता है और मन की उदारता बढ़ती है। 

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4. सेवा: सेवा का अर्थ है दूसरों की मदद करना। दूसरों की सेवा करने से मन में प्रेम और करुणा की भावना बढ़ती है। 

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5. क्षमा: क्षमा करने से मन की शांति मिलती है और नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति मिलती है। 

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6. संयम: संयम का अर्थ है इंद्रियों पर नियंत्रण रखना। इंद्रियों पर नियंत्रण रखने से मन एकाग्र होता है और भक्ति में आसानी होती है। 

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सत्य: सत्य का अर्थ है सच बोलना और सच्चा जीवन जीना। सत्य बोलने से मन शुद्ध होता है और भक्ति में सफलता मिलती है। 

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अहिंसा का अर्थ है किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाना। अहिंसा से मन में प्रेम और करुणा की भावना बढ़ती है। 

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ब्रह्मचर्य का अर्थ है मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना। 

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